दिल्ली-NCR में कथित तौर पर फायरिंग के जरिए दहशत पैदा कर रंगदारी की गतिविधियों को अंजाम देने की तैयारी कर रहे तीन युवकों को दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार गिरफ्तार किए गए तीनों व्यक्ति उत्तर प्रदेश के मथुरा से जुड़े एक नए आपराधिक गिरोह के कथित सदस्य हैं।
13 अगस्त को सामने आई जानकारी के मुताबिक दिल्ली पुलिस का कहना है कि तीनों कथित शूटर दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में संभावित निशानों की तलाश कर रहे थे। पुलिस का आरोप है कि योजना कुछ लोगों या कारोबारियों को डराने के उद्देश्य से फायरिंग करने और उसके जरिए रंगदारी का दबाव बनाने से जुड़ी थी।
दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल द्वारा की गई कार्रवाई इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि पुलिस का दावा है कि संभावित वारदात को अंजाम दिए जाने से पहले ही आरोपियों तक पहुंच बना ली गई।
रिपोर्ट के अनुसार गिरफ्तार किए गए लोगों में कथित गैंग से जुड़े प्रमुख व्यक्ति की भूमिका की भी जांच की जा रही है। पुलिस अब यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि गिरोह का नेटवर्क कितना बड़ा है और उसके संपर्क दिल्ली-NCR के अलावा किन क्षेत्रों में मौजूद हैं।
पुलिस ने आरोपियों के पास से firearms बरामद होने का भी दावा किया है। हथियारों की बरामदगी के बाद जांच का एक महत्वपूर्ण हिस्सा यह पता लगाना होगा कि ये हथियार कहां से आए, किसने उपलब्ध कराए और इनका इस्तेमाल पहले किसी आपराधिक घटना में हुआ है या नहीं।
ऐसे मामलों में बरामद हथियारों की बैलिस्टिक और फॉरेंसिक जांच महत्वपूर्ण हो सकती है। यदि किसी हथियार का इस्तेमाल पहले किसी फायरिंग की घटना में किया गया हो तो वैज्ञानिक जांच के जरिए उसका संबंध स्थापित करने का प्रयास किया जा सकता है।
पुलिस के लिए दूसरा महत्वपूर्ण सवाल कथित गिरोह के वित्तीय और संचार नेटवर्क का है। संगठित अपराध से जुड़े मामलों में मोबाइल फोन, डिजिटल संदेश, कॉल रिकॉर्ड और संदिग्ध वित्तीय लेन-देन जांच का हिस्सा बन सकते हैं।
दिल्ली पुलिस अब यह भी पता लगा सकती है कि जिन संभावित targets की तलाश किए जाने का दावा किया गया है, उनकी पहचान पहले से तय थी या आरोपी दिल्ली-NCR में नए targets खोज रहे थे।
इस कार्रवाई का मथुरा कनेक्शन स्थानीय स्तर पर भी महत्वपूर्ण है। यदि जांच में गिरोह के अन्य सदस्यों या सहयोगियों के मथुरा अथवा आसपास के क्षेत्रों में मौजूद होने की जानकारी सामने आती है तो दिल्ली पुलिस उत्तर प्रदेश पुलिस के साथ समन्वय कर आगे की कार्रवाई कर सकती है।
हालांकि इस मामले में एक कानूनी बात स्पष्ट रखना जरूरी है। पुलिस द्वारा किसी व्यक्ति को गिरफ्तार करना या उसके खिलाफ गंभीर आरोप लगाना अदालत द्वारा दोषी ठहराए जाने के समान नहीं है। आरोपियों के खिलाफ पुलिस द्वारा जुटाए गए साक्ष्य न्यायिक प्रक्रिया के दौरान अदालत के सामने रखे जाएंगे।
इसलिए फिलहाल इन्हें “कथित शूटर” या “आरोपी” के रूप में ही प्रस्तुत किया जाना चाहिए।
13 अगस्त तक उपलब्ध जानकारी के अनुसार तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया है और पुलिस ने उनके पास से हथियार बरामद करने का दावा किया है। जांच आगे बढ़ने पर कथित गिरोह के नेटवर्क, हथियारों के स्रोत और संभावित targets के बारे में और जानकारी सामने आ सकती है।