भारत में स्वास्थ्य सेवाओं को आम नागरिकों तक पहुंचाने के लिए पिछले वर्षों में सार्वजनिक स्वास्थ्य ढांचे में बड़े बदलाव किए गए हैं। इनमें आयुष्मान भारत सरकार की सबसे प्रमुख योजनाओं में शामिल है।
इस कार्यक्रम को केवल अस्पताल में मुफ्त या कैशलेस इलाज की योजना के रूप में समझना पूरी तस्वीर नहीं है। आयुष्मान भारत का ढांचा प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा से लेकर जरूरत पड़ने पर अस्पताल में भर्ती होकर इलाज कराने तक अलग-अलग स्तरों को जोड़ने का प्रयास करता है।
इसका एक महत्वपूर्ण हिस्सा Ayushman Arogya Mandir है। पहले इन्हें Health and Wellness Centres के नाम से जाना जाता था। इन केंद्रों का उद्देश्य प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं को लोगों के घर के नजदीक उपलब्ध कराना है।
सरकारी दस्तावेजों के मुताबिक इस पहल के तहत 1.5 लाख Health and Wellness Centres स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया था, जिन्हें बाद में Ayushman Arogya Mandir नाम दिया गया।
इन केंद्रों में केवल सामान्य बीमारी के उपचार तक सेवा सीमित रखने के बजाय मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, गैर-संचारी रोगों की स्क्रीनिंग और दूसरी प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं को शामिल करने की दिशा में काम किया गया है।
आयुष्मान भारत का दूसरा व्यापक रूप से पहचाना जाने वाला हिस्सा प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना यानी PM-JAY है।
इसका उद्देश्य पात्र परिवारों को अस्पताल में भर्ती होने से जुड़े बड़े चिकित्सा खर्च से आर्थिक सुरक्षा प्रदान करना है। योजना के तहत पात्र लाभार्थी सूचीबद्ध अस्पतालों में निर्धारित नियमों के अनुसार उपचार प्राप्त कर सकते हैं।
सरकार ने बाद में 70 वर्ष और उससे अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों तक स्वास्थ्य सुरक्षा का दायरा बढ़ाने के लिए Ayushman Bharat Vay Vandana से जुड़ा विस्तार भी किया।
भारत जैसे विशाल देश में स्वास्थ्य सेवाओं की चुनौती केवल अस्पताल बनाने की नहीं है। ग्रामीण क्षेत्रों में डॉक्टरों की उपलब्धता, प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मी, जांच सुविधाएं, दवाइयों की उपलब्धता और मरीजों को समय पर referral देना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
इसी कारण डिजिटल स्वास्थ्य व्यवस्था भी स्वास्थ्य नीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बन रही है। Health Management Information System और Integrated Health Information Platform जैसे सरकारी डिजिटल प्लेटफॉर्म स्वास्थ्य संबंधी डेटा और disease surveillance को व्यवस्थित करने में भूमिका निभाते हैं।
सरकारी HMIS पोर्टल पर स्वास्थ्य संकेतकों से जुड़ा डेटा राज्यों और स्वास्थ्य संस्थानों द्वारा उपलब्ध कराया जाता है। इससे सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था में trends को समझने में सहायता मिल सकती है।
हालांकि योजनाओं के बड़े आंकड़ों के साथ ground-level implementation भी महत्वपूर्ण है। किसी लाभार्थी को वास्तव में समय पर इलाज मिला या नहीं, सूचीबद्ध अस्पताल उपलब्ध था या नहीं और मरीज को कितना खर्च स्वयं उठाना पड़ा—ये सभी स्वास्थ्य योजना के वास्तविक प्रभाव को समझने के लिए जरूरी सवाल हैं।
पत्रकारिता के स्तर पर भी केवल योजना की घोषणा लिखने के बजाय स्थानीय जिले में उसकी वास्तविक उपलब्धता की पड़ताल उपयोगी होगी।
मथुरा जैसे जिले में यह जांचा जा सकता है कि कितने सरकारी और निजी अस्पताल PM-JAY में सूचीबद्ध हैं, किन बीमारियों का उपचार उपलब्ध है और मरीजों को किन समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
इस तरह राष्ट्रीय स्वास्थ्य योजना को स्थानीय स्तर की उपयोगी खबर में बदला जा सकता है।