भारत में Integrated Disease Surveillance Programme यानी IDSP इसी प्रकार की निगरानी व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसे Integrated Health Information Platform के माध्यम से भी समर्थन मिलता है। स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक IDSP और IHIP का उद्देश्य बीमारी से जुड़े संकेतों और outbreaks की निगरानी में सहायता करना है।
Disease surveillance में अलग-अलग स्तर से डेटा एकत्र किया जाता है। अस्पतालों, प्रयोगशालाओं और स्वास्थ्य संस्थानों से आने वाली जानकारी के आधार पर यह पता लगाने की कोशिश की जाती है कि किसी क्षेत्र में किसी बीमारी के मामले असामान्य रूप से तो नहीं बढ़ रहे।
उदाहरण के लिए दिल्ली में H1N1 के मामलों की संख्या सामने आने में NCDC के surveillance data की भूमिका महत्वपूर्ण है। राजधानी में 1,449 मामले दर्ज होने की जानकारी इसी तरह के निगरानी आंकड़ों के आधार पर सामने आई है।
दूसरी तरफ बालाघाट जैसी स्थिति अलग चुनौती प्रस्तुत करती है। वहां छह बच्चों की मौत और 100 से अधिक बच्चों के बीमार होने की रिपोर्ट है, लेकिन बीमारी का निश्चित कारण अभी पता नहीं चला है।
ऐसे outbreak में epidemiologists यह पता लगाने का प्रयास करते हैं कि प्रभावित मरीजों के बीच क्या समानता है।
मरीज कहां रहते हैं, उन्होंने क्या खाया या पिया, लक्षण कब शुरू हुए, उनकी उम्र क्या है और क्या किसी खास क्षेत्र में मामले अधिक हैं—इन सभी जानकारियों से संभावित कारण की दिशा मिल सकती है।
इसके बाद laboratory testing महत्वपूर्ण होती है। नमूनों की जांच के आधार पर किसी virus, bacteria या दूसरे कारण की पुष्टि या उसे खारिज किया जा सकता है।
लेकिन जांच पूरी होने से पहले अनुमान को तथ्य की तरह प्रसारित करना खतरनाक हो सकता है।
यही कारण है कि किसी “रहस्यमयी बीमारी” की खबर में मीडिया को विशेष सावधानी रखनी चाहिए। “नया वायरस आ गया”, “महामारी फैल गई” या किसी भोजन-पानी को कारण घोषित करने जैसे headline वैज्ञानिक पुष्टि के बिना नहीं लगाने चाहिए।
NCDC स्वयं संक्रामक रोगों की जानकारी के तेजी से प्रसार और disease control से संबंधित काम करने वाली केंद्रीय संस्था है।
इसलिए सार्वजनिक स्वास्थ्य खबरों में आधिकारिक surveillance data और laboratory confirmation को प्राथमिकता देना आवश्यक है।